Economic Activities Around Us Class 6 Question and Answer NCERT Solutions. This page add question and answer of class 6 social Science.
NCERT QUESTIONS
| Q. 1. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है? यह द्वितीयक क्षेत्रक से किस प्रकार भिन्न है? दो उदाहरण दीजिए। ANS – प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector) वह क्षेत्रक है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़े कार्य किए जाते हैं। इसमें कच्चे माल का सीधा दोहन और उत्पादन होता है। द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector) वह क्षेत्रक है जिसमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल को (उद्योगों में बदलने) का कार्य किया जाता है। प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक में अंतर प्राथमिक क्षेत्रक: प्रकृति पर आधारित, कच्चे माल का उत्पादन द्वितीयक क्षेत्रक: उद्योगों में कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलना | प्राथमिक क्षेत्रक के उदाहरण: कृषि खनन द्वितीयक क्षेत्रक के उदाहरण: कपड़ा उद्योग चीनी उद्योग इस प्रकार, प्राथमिक क्षेत्रक कच्चा माल प्रदान करता है और द्वितीयक क्षेत्रक उसी कच्चे माल से वस्तुओं का निर्माण करता है। | Q. 1. What is the primary sector? How is it different from the secondary sector? Give two examples. Ans – The primary sector is one that involves activities directly related to natural resources. It involves the direct exploitation and production of raw materials. Secondary Sector is the sector in which the work of converting the raw materials obtained from the primary sector (into industries) is done. Difference between the primary and secondary sectors Primary sector: Based on nature, producing raw materials Secondary sector: Converting raw materials into finished goods in industries. Examples of the primary sector: Agriculture Mining Examples of the secondary sector: Textile industry Sugar industry. Thus, the primary sector provides raw materials and the secondary sector manufactures goods from the same raw materials. |
| Q.2. द्वितीयक क्षेत्रक किस प्रकार से तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर है?उदाहरणों द्वारा समझाइए। Ans – द्वितीयक क्षेत्रक कई तरीकों से तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर होता है, क्योंकि उत्पादन के बाद वस्तुओं को बाज़ार तक पहुँचाने, सेवाएँ प्राप्त करने और उद्योगों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सेवाओं की आवश्यकता होती है। द्वितीयक क्षेत्रक की तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भरता स्टील फैक्ट्री को लौह अयस्क रेलवे या ट्रक से लाया जाता है और तैयार स्टील को ट्रकों द्वारा बाज़ार में भेजा जाता है। कोई कपड़ा मिल मशीनें खरीदने के लिए बैंक से ऋण लेती है।मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से फैक्ट्री मालिक ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क करता है। निष्कर्ष द्वितीयक क्षेत्रक का विकास तृतीयक क्षेत्रक की सेवाओं पर निर्भर करता है।बिना परिवहन, बैंकिंग, संचार और व्यापार सेवाओं के उद्योगों का सुचारु संचालन संभव नहीं है। |
Q. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों के बीच परस्पर निर्भरता का एक उदाहरण दीजिए। इसको प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का प्रयोग करते हुए समझाइए।
Give an example of interdependence between primary, secondary and tertiary sectors. Show it using a flow diagram.
Ans – प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर होते हैं। इसे एक सरल उदाहरण और प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) से समझते हैं—
The primary, secondary, and tertiary sectors are interdependent. Let’s understand this with a simple example and flow chart:
उदाहरण: गेहूँ से रोटी बनने तक की प्रक्रिया
प्राथमिक क्षेत्रक Primary Sector
इस क्षेत्रक में प्राकृतिक संसाधनों से कच्चा माल प्राप्त किया जाता है।
उदाहरण: किसान खेत में गेहूँ उगाता है।
द्वितीयक क्षेत्रक Secondary Sector
इसमें कच्चे माल को कारखानों में तैयार माल में बदला जाता है।
उदाहरण: गेहूँ को मिल में पीसकर आटा बनाया जाता है और फैक्ट्री में ब्रेड/रोटी तैयार की जाती है।
तृतीयक क्षेत्रक Tertiary Sector
यह क्षेत्रक सेवाएँ प्रदान करता है, जिससे उत्पादन और वितरण संभव होता है।
उदाहरण: परिवहन, दुकानें, बैंक और बाज़ार के माध्यम से रोटी उपभोक्ता तक पहुँचती है।
(फ्लो चार्ट)
किसान द्वारा गेहूँ उत्पादन
↓
(प्राथमिक क्षेत्रक)
↓
गेहूँ → आटा → ब्रेड/रोटी
↓
(द्वितीयक क्षेत्रक)
↓
परिवहन + दुकान + बैंक + बाज़ार
↓
(तृतीयक क्षेत्रक)
↓
उपभोक्ता